सोमवार 14 सितंबर 2026 - 05:21
माहे रबीउस् सानी की अहम मुनासेबतें

माहे रबीउस् सानी की अहम मुनासेबतें

लेखक: मौलाना सैयद अली हाशिम आब्दी

हौज़ा / माहे रबीउस् सानी के महीने में बहुत सारी मुनासिबतें है जो आपकी खिदमत में पेश की जा रही है

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,माहे रबीउस् सानी के महीने में बहुत सारी मुनासिबतें है जो आपकी खिदमत में पेश की जा रही है

हिजरी साल का चौथा महीना माह-ए-रबीउस् सानी है। माह-ए-रबीउल अव्वल के बाद आने की वजह से इसे रबीउल आखिर या रबीउस् सानी कहा जाता है। यह महीना कई लिहाज से अहमियत रखता है।

सरकारे खत्मी मर्तबत हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहे व आलेहि वसल्लम की विलादत के बाद कायनात में, खुसूसन जज़ीरतुल अरब और बिलखुसूस मक्का मुकर्रमा में रोनुमा होने वाली तब्दीलियां, आप की हिजरत के बाद मदीना मुनव्वरा में अहकाम की आयात का नुज़ूल और उन पर अमल और आदिलाना निज़ाम-ए-हुकूमत का क़याम, आप की शहादत के बाद इस्लाम के आदिलाना निज़ाम में आने वाला इनहेराफ, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम के बाद अमीरुल मोमेनीन इमाम अली अलैहिस्सलाम की 25 साला खाना-नशीनी का आग़ाज़, आप की इकलौती यादगार बेटी हजरत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा पर ढाए गए मसायब और उनकी मज़लूमाना शहादत से पहले के हालात। इसी तरह इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और आपके बावफा असहाब की शहादत और अहले हरम की मज़लूमाना असीरी के बाद रिहाई और उनकी मदीना वापसी के बाद वहां और दूसरे इस्लामी ममालिक में पेश आने वाले हालात।

जै़ल में माह-ए-रबीउस् सानी की अहम तारीखी मुनासबतें पेश हैं -

1 रबीउस् सानी
1. शहादते रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम के बाद लश्कर-ए-उसामा रूमियों से जंग के लिए रवाना हुआ - सन 11 हिजरी।
वाजे़ह रहे कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम ने अपनी ज़िंदगी के आखिरी अय्याम में मुसलमानों को रूमियों से जंग के लिए लश्कर-ए-उसामा में भेजा था लेकिन उस वक्त कोई नहीं गया और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम की नाफरमानी की।
2. क़याम-ए-तव्वाबीन - सन 65 हिजरी
3. शहादत इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम - (एक रिवायत के मुताबिक़) - सन 114 हिजरी

2 रबीउस् सानी
1. इब्ने मोतज़ का क़त्ल - सन 296 हिजरी। बनी अब्बास का वाहिद हाकिम अबुल अब्बास अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद मोतज़ था जिसने सिर्फ एक दिन हुकूमत की। अगरचे उसने अमीरुल मोमेनीन अलैहिस्सलाम की मदह में क़सीदे और इमाम हुसैन (अ) के ग़म में मरसिये लिखे, लेकिन वह अब्बासी हुकूमत के खिलाफ अलवियों के क़याम का सख्त मुखालिफ था और उसने क़सम खाई थी कि अगर उसे हुकूमत मिली तो हुकूमत के खिलाफ क़याम करने वाले तमाम अलवियों को कत्ल करा देगा। ये भी खुदा की हिकमत है कि उसे हुकूमत मिली भी तो सिर्फ एक दिन के लिए।

क्योंकि उसके ज़माने में तख्त पर तो बनी अब्बास ही बैठते थे लेकिन हुकूमत के तमाम इख्तियारात तुर्कों के हाथ में थे। तुर्क जो चाहते करते, जिसे चाहते तख्त पर बिठाते और जिसे चाहते उतार देते, कै़द कर लेते और क़त्ल करा देते। बनी अब्बास उनके सामने इतने मजबूर थे कि उनके हुक्म पर एक के बाद दूसरा तख्त पर बैठता और आखिर में तुर्कों के हाथों ज़िल्लत-आमेज़ माज़ूली, असीरी और क़त्ल उनका मुक़द्दर बनती।

3 रबीउस् सानी
1. हजरत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम जुर्जान (सूबा गुलिस्तान ईरान) तशरीफ लाए - सन 255 हिजरी

4 रबीउस् सानी
1. विलादत हजरत अब्दुल अजीम हसनी अलैहिस्सलाम - सन 173 हिजरी। नामवर आलिम और रावी-ए-हदीस हज़रत अब्दुल अजीम हसनी का नसब 4 वास्तों से इमाम हसन मुज्तबा अलैहिस्सलाम तक पहुंचता है। आपको कई मासूम आइम्मा अलैहिमुस्सलाम की सोहबत का शरफ हासिल हुआ। आपने अपना अक़ीदा इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम की ख़िदमत में पेश किया तो इमाम ने उसकी ताईद और तौसीफ फरमाई। आपका मज़ार-ए-मुक़द्दस शहर-ए-रय (तेहरान) में है। कुछ रिवायात के मुताबिक़ आपके ज़ायर को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की ज़ियारत का सवाब मिलता है।

6 रबीउस् सानी
1. हिशाम बिन अब्दुल मलिक बिन मरवान की मौत - सन 125 हिजरी

8 रबीउस् सानी
1. शहादत हजरत फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा - (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम की शहादत के 40 दिन बाद वाली रिवायत के मुताबिक) - सन 11 हिजरी
2. विलादत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम - सन 232 हिजरी
3. वफात मरजए तकलीद आयतुल्लाहिल उजमा फतहुल्लाह ग़रवी इस्फहानी र०अ० - सन 1339 हिजरी

9 रबीउस् सानी
1. वफात आलिम, फकक़ीह-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम व मुफस्सिर-ए-क़ुरआन आयतुल्लाह अकबर हाशमी रफसंजानी र०अ० - साबिक़ सद्र इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान - सन 1438 हिजरी

10 रबीउस् सानी
1. वफात करीमा-ए-अहलेबैत हजरत फातिमा मासूमा सलामुल्लाह अलैहा क़ुम - सन 201 हिजरी
2. विलादत बा-सआदत हजरत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम - सन 232 हिजरी
3. गुम्बद-ए-इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम का इनहेदाम - सन 1330 हिजरी। रूसी फौजियों ने हजरत इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम के रौज़ा-ए-मुबारक के गुम्बद को मुनहदिम किया।

12 रबीउस् सानी
1. हुक्म-ए-खुदा से पंजगाना नमाज की तादाद 17 रकअत मुक़र्रर हुई - सन 1 हिजरी
2. आग़ाज़-ए-हुकूमत अबुल अब्बास सफ्फाह - पहला अब्बासी हाकिम - सन 132 हिजरी

16 रबीउस् सानी
1. वफात आयतुल्लाहिल उजमा सैयद महमूद हाशमी शाहरूदी र०अ० - सन 1440 हिजरी। आप आलिम, फकीह, मरजए तकलीद और इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान के साबिक़ चीफ जस्टिस, मेंबर-ए-मजलिस-ए-खुबरगान-ए-रहबरी और साबिक़ सद्र मजमए तश्खीस-ए-मसलहत-ए-निज़ाम थे।

19 रबीउस् सानी
1. वफात आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद सदरुद्दीन सद्र र०अ० - सन 1373 हिजरी

22 रबीउस् सानी
1. वफात इमामज़ादा हजरत मूसा मुबरक़ा अलैहिस्सलाम - सन 296 हिजरी। आप इमाम मुहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम के फरजंद, इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के भाई और सादात-ए-रिज़वी के जद्दे आला हैं। आपका मज़ार क़ुम में चहल अख्तरान के नाम से मशहूर है क्योंकि आपके जवार में आपकी नस्ल के 40 सादात दफन हैं।
2. वफात मुहद्दिस, मुफस्सिर, फकीह मुल्ला मोहसिन फैज काशानी र०अ० - सन 1091 हिजरी

23 रबीउस् सानी
1. वफात आलिम, फकीह व मरजए तकलीद आयतुल्लाहिल उज़मा अहमद नराक़ी र०अ० - साहिब-ए-किताब मेराजुस् सआदह - सन 1245 हिजरी

25 रबीउस् सानी
1. मुआविया बिन यज़ीद ने हुकूमत से किनारा-कशी की - सन 64 हिजरी। तीसरा उमवी हाकिम मुआविया बिन यज़ीद अपने बाप यज़ीद मलऊन की हलाकत के बाद वसीयत के मुताबिक़ हाकिम बना। तख्त पर आते ही उसने एक तारीखी खुतबा दिया जिसमें अपने बाप-दादा के गुनाहों और इनहेराफ की मज़म्मत की, अमीरुल मोमेनीन इमाम अली अलैहिस्सलाम से जंग और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को अज़ीम गुनाह बताया और खुद को हुकूमत से अलग करके खाना-नशीन हो गया और कुछ ही दिनों बाद दुनिया से रुखसत हो गया। कुछ रिवायातों के मुताबिक़ बनी उमय्या ने उसे ज़हर दे दिया था।

26 रबीउस् सानी
1. वफात आक़ा नजफी क़ूचानी र०अ० - सन 1363 हिजरी। 14वीं सदी हिजरी के मशहूर शिया आलिम और फक़ीह आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद हसन हुसैनी क़ूचानी र०अ० मरहूम आखुंद खुरासानी र०अ० के शागिर्द थे। 30 बरस की उम्र में दर्जा-ए-इज्तेहाद पर फाइज़ हुए।
2. वफात अल्लामा सैयद मुज्तबा मूसवी लारी र०अ० - सन 1434 हिजरी। आप मशहूर आलिम, फक़ीह और अहले क़लम थे, आपने मुतअद्दिद मौज़ूआत पर किताबें लिखीं। 28 जुबानों में आपकी किताबों का तर्जुमा हो चुका है।

28 रबीउस् सानी
1. वफात अल्लामा अमीनी  र०अ० - सन 1390 हिजरी। 14वीं सदी हिजरी के मशहूर शिया आलिम, फक़ीह, मुहद्दिस, मुतकल्लिम और मोअर्रिख़ अल्लामा अब्दुल हुसैन अमीनी र०अ० ने कई किताबें लिखीं जिनमें "अल-ग़दीर" सबसे मशहूर है।

29 रबीउस् सानी
1. खालिद बिन वलीद की मौत - सन 21 हिजरी। खालिद बिन वलीद ने फतह-ए-मक्का से पहले इस्लाम कबूल किया था। इस्लाम से पहले वह इस्लाम और रसूल-ए-इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम का सख्त दुश्मन था। इस्लाम लाने के बाद भी उसका किरदार इस्लामी किरदार से हमआहंग नहीं था। उसी ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम के बाद पहले दौर-ए-खिलाफत में सहाबी-ए-रसूल जनाब मालिक बिन नुवैरा र०अ० को ना हक़ शहीद किया और उसी रात उनकी हुरमत पामाल की। लेकिन हुकूमत ने उसे सैफ-ए-रसूल कह कर माफ कर दिया।

30 रबीउस् सानी
1. वफात उम्मुल मोमेनीन, उम्मुल मसाकीन जनाब जैनब बिन्ते खुजैमा र०अ० - सन 4 हिजरी

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